‘अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है’ यह कथन किसका है?

(A) सारिपुत्र
(B) स्कंदगुप्त
(C) चाणक्य
(D) शिखर स्वामी

Answer : स्कंदगुप्त
Explanation : 'अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है' यह कथन स्कंदगुप्त का है। यह जयशंकर प्रसाद कृत 'स्कंदगुप्त' नाटक में स्कदगुप्त का स्वगत कथन है। ‘स्कंदगुप्त’ नाटक 1928 में प्रकाशित एक ऐतिहासिक नाटक है। इसमें गुप्तवंश के सन् 455 से लेकर सन् 466 तक के 11 वर्षों का वर्णन है। इस नाटक में लेखक ने गुप्त कालीन संस्कृति, इतिहास, राजनीति संधर्ष, पारिवारिक कलह एवं षडयंत्रों का वर्णन किया है। यह नाटक देशभक्त, वीर, साहसी, प्रेमी स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाट्यकृति है।यह नाटक देशभक्त, वीर, साहसी, प्रेमी स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाट्यकृति है।
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Web Title : Adhikar Sukh Kitna Madak Aur Sarahin Hai Yah Kathan Kiska Hai