जैन धर्म के त्रिरत्न कौन से हैं?

(A) सम्यक् ज्ञान
(B) सम्यक् चरित्र
(C) सम्यक् दर्शन
(D) उपयुक्त सभी

Answer : उपयुक्त सभी
Explanation : जैन धर्म के त्रिरत्न हैं– सही विश्वास (सम्यक दर्शन), सही ज्ञान (सम्यक ज्ञान), सही आचरण (सम्यक चरित्र। इस प्रकार मोक्ष की प्रक्रिया इन तीनों तत्त्वों के समन्वय पर टिकी हुई है। वहीं जैन पंच-महावतों का पालन करना आवश्यक होता है जो कि सही आचरण के तत्त्व हैं। अहिंसा - इसका अर्थ है- मन, वचन, कर्म से किसी को भी कष्ट न पहुँचाना। सत्य-असत्य से संयम अर्थात मन, वचन, कर्म से असत्य का त्याग कर देना। अस्तेय-चोरी करने से संयम। ब्रह्मचर्य - कामुक और आकस्मिक सुखों से संयम। अपरिग्रह - इसका अर्थ है किसी भी प्रकार के साधनों का संग्रह न करना।
Useful for : UPSC, State PSC, IBPS, SSC, Railway, NDA, Police Exams
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Web Title : Jain Dharm Ke Triratna Kaun Se Hain