जनजाति के पिछड़े हिंदू किसने कहा है?

(A) बी.एस. गुहा
(B) जी.एस. घुरिए
(C) काका कालेलकर
(D) बी. आर. अंबेडकर

Answer : जी.एस. घुरिए
Explanation : जनजाति के पिछड़े हिंदू जी.एस. घुरिए ने कहा है। उन्होंने महाराष्ट्र के ‘महादेव कोली' जनजाति का अध्ययन किया तथा 'द महादेव कोलीस' पुस्तक की रचना की। इनका कहना है, कि जनजातियां ‘पिछड़े हिंदू' (Back ward Hindus) ही हैं, अतः इन्हें समाज में पूर्णतः आत्मसात कर लेना चाहिए अर्थात् घुरिए ‘आत्मसात की नीति' (Assimilation Policy) का सुझाव देते हैं।

भारत में जी.एस. घुरिये को जाति तथा प्रजाति का अध्ययन करने वाला प्रमुख विद्वान माना जाता है। 1932 ई. में प्रकाशित उनकी पुस्तक कास्ट एण्ड रेस इन इंडिया' इस विषय पर लिखी गई एक आधिकारिक पुस्तक मानी जाती है। इस पुस्तक में उन्होंने जाति तथा प्रजाति के संबंधों पर प्रचलित सिद्धांतों की विस्तारपूर्वक आलोचना की। घुरिये; रिजले के इन विचारों को अंशतः सत्य मानते थे तथा इसलिए उनसे पूरी तरह से सहमत नहीं थे। उनका मत था, कि रिजले द्वारा उच्च जातियों को आर्य तथा निम्न जातियों को अनार्य बताया जाना केवल उत्तरी भारत के लिए ही सही है भारत के अन्य भागों में विभिन्न प्रजातीय समूहों को आपस में काफी लंबे समय से मेल-मिलाप था। अतः प्रजातीय शुद्धता केवल उत्तर भारत में ही बसी हुई थी, क्योंकि वहां अंतर्विवाह निषिद्ध था। शेष भारत में अपनी ही जाति या समूह में विवाह करने का प्रचलन उन वर्गों में हुआ जो प्रजातीय स्तर पर वैसे ही भिन्न थे।
Tags : समाजशास्त्र प्रश्नोत्तरी
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Web Title : Jan Jati Ke Pichde Hindu Kisne Kaha Hai