मानो माई घन घन अंतर दामिनी में कौन सा अलंकार है?

(A) उत्प्रेक्षा अलंकार
(B) काव्य लिंग अलंकार
(C) विशेषोक्ति अलंकार
(D) विभावना अलंकार

Answer : उत्प्रेक्षा अलंकार
Explanation : मानो माई घन घन अंतर दामिनी। घन दामिनी दामिनी घन अंतर, सोभित हरि-​ब्रज भामिनी।। पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। उपर्युक्त काव्य-पंक्तियों में रासलीला का सुन्दर दृश्य दिखाया गया है। रास के समय पर गोपी को लगता था कि कृष्ण उसके पास नृत्य कर रहे हैं। गोरी गोपियां और श्यामवर्ण कृष्ण मंडलाकर नाचते हुए ऐसे लगते हैं मानो बादल और बिजली, बिजली और बादल साथ-साथ शोभायमान हो रहे हों। यहां गोपिकाओं में बिजली की और कृष्ण में बादल की सम्भावना की गई है। अत: उत्प्रेक्षा अलंकार है।
उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा – जहां उपमेय में उपमान की संभावना अथवा कल्पना कर ली गई हो, वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसके बोधक शब्द हैं– मनो, मानो, मनु, मनहु, जानो, जनु, जनहु, ज्यों आदि। सामान्य हिंदी प्रश्न पत्र में उत्प्रेक्षा अलंकार संबंधी प्रश्न पूछे जाते है। इसलिए यह प्रश्न आपके लिए कर्मचारी चयन आयोग, बीएड, आईएएस, सब इंस्पेक्टर, पीसीएस, बैंक भर्ती परीक्षा, समूह 'ग' आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी साबित होगें।
Tags : अलंकार, अलंकारिक शब्द, उत्प्रेक्षा अलंकार
Useful for : UPSC, State PSC, IBPS, SSC, Railway, NDA, Police Exams
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Web Title : Mano Mai Ghan Ghan Antar Damini