मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत् का अर्थ

(A) अपने किये गये दोषों का फल निश्चय ही स्वयं को भोगना पड़ता है।
(B) अत्यधिक प्रेम पाप की आशंका उत्पन्न करता है।
(C) माता पिता की भली प्रकार से सेवा करनी चाहिये।
(D) इनमें से कोई नहीं

Answer : माता पिता की भली प्रकार से सेवा करनी चाहिये।
Explanation : संस्कृत सूक्ति 'मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्' का हिंदी में अर्थ– माता पिता की भली प्रकार से सेवा करनी चाहिये। State TET, CTET, TGT, PGT आदि परीक्षाओं के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत सूक्तियां हिंदी में अर्थ सहित पढ़े–
चरति विमुक्ताहारं व्रतमिव भवतो रिपुस्त्रीणाम्। (कादंबरी/चंद्रापीडकथा)
हिंदी में अर्थ– आपके शत्रुओं की स्त्रियों के स्तनों का जोड़ा ऐसा लगता है, जैसे कोई तपस्वी भोजन का त्याग करके तप कर रहा हो।

चक्रारपंक्तिरिव गच्छति भाग्यपंक्ति:। (स्वप्नवासवदत्तम्)
हिंदी में अर्थ– समय के क्रम में बदलती हुई संसार में भाग्य पंक्ति पहिए के अरो की तरह चलती है।

सोsयं न पुत्रकृतक: पदवीं मृगस्ते (अभिज्ञान शाकुन्तलम्)
हिंदी में अर्थ– कण्व का कथन– पुत्रवत् पाला हुआ मृग तेरा मार्ग नहीं छोड़ रहा है।
Tags : संस्कृत, संस्कृत सूक्ति
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Web Title : Mataram Pitram Tasmat Sarva Yatnen Pujyate