मुद्रा के अवमूल्यन का प्रभाव क्या होता है?

(A) घरेलू मुद्रा के विदेशी मूल्य को बढ़ाता है
(B) विदेशी बाजारों में घरेलू निर्यातों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है
(C) व्यापार सन्तुलन में सुधार लाता है
(D) प्रतिस्पर्धात्मकता को घटाता है

Answer : विदेशी बाजारों में घरेलू निर्यातों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है
Explanation : किसी मुद्रा के अवमूल्यन का प्रभाव यह है कि वह अनिवार्य रूप से विदेशी बाजारों में घरेलू निर्यातों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है। अवमूल्यन का तात्पर्य विदेशी मुद्राओं के सन्दर्भ में अपने देश की मुद्रा के मूल्य में जान-बूझकर कमी करना है। अवमूल्यन तभी सफल होता है, जब कोई दूसरा देश इसके विरोध में अपनी मुद्रा का अवमूल्यन न करे। इसके अतिरिक्त घरेलू बाजार में उन वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी, जिनके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री विदेशों से आयात करनी पड़ती है। अतः अवमूल्यन के कारण घरेलू मूल्य में होने वाली वृद्धि दर अवमूल्यन की तुलना में कम होनी चाहिए।
Useful for : UPSC, State PSC, IBPS, SSC, Railway, NDA, Police Exams
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Web Title : Mudra Ka Avmulyan Ka Prabhav Kya Hota Hai