न धर्मवृद्धेषु वयः समीक्ष्यते का अर्थ

(A) किसी के न्यास अर्थात् धरोहर की रक्षा करना दु:खपूर्ण (दुष्कर) है।
(B) कष्ट सहन करने वाले तपस्वियों में से किससे प्रार्थना करें।
(C) कम उम्र वाले व्यक्ति भी तप के कारण आदरणीय होते हैं।
(D) इनमें से कोई नहीं

Answer : कम उम्र वाले व्यक्ति भी तप के कारण आदरणीय होते हैं।
Explanation : संस्कृत सूक्ति 'न धर्मवृद्धेषु वयः समीक्ष्यते' का हिंदी में अर्थ– कम उम्र वाले व्यक्ति भी तप के कारण आदरणीय होते हैं। संस्कृत की यह सूक्ति कुमारसम्भवम्– 5/16 से ली गई है। State TET, CTET, TGT, PGT आदि परीक्षाओं के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत सूक्तियां हिंदी में अर्थ सहित पढ़े–
उत्सवप्रिया: खलु: मनुष्या: (अभिज्ञान शाकुन्तलम् अड़्क-6)
हिंदी में अर्थ– मनुष्य उत्सव प्रिय होते हैं।

उपस्थिता शोणितपारणा से सुरद्विषश्चान्द्रमसी सुधेव। (रघुवंश-2/39)
हिंदी में अर्थ– सिंह दिलीप से कहता है कि यह गाय मेरी रक्तमयी पारणा है, उपवासोपरान्त का भोजन है वह मुझे भूख मिटाने के लिए उसी प्रकार पर्याप्त है, जिस प्रकार राहु के लिए चन्द्रमा का अमृत।
Tags : संस्कृत, संस्कृत सूक्ति
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