रैयतवाड़ी क्षेत्रों की स्थिति कैसी थी?

(A) अधिकांश भूमि साहूकारों, व्यापारियों और किसानों के हाथों में चली गई थी, जिस पर सामान्यतः पट्टेदारों की सेवाओं का उपयोग था।
(B) भूमिहीन श्रमिक भू-स्वामी बन गए थे।
(C) इससे पट्टेदारों को उच्च मूल्यों पर भूमि पटटे की पद्धति पर रोक लग गई थी।
(D) जमींदारी पूरी तरह से विनष्ट हो गई थी।

Question Asked : UPSC EPFO Exam 2021
Answer : जमींदारी पूरी तरह से विनष्ट हो गई थी।
Explanation : भारत में सर्वप्रथम रैयतवाड़ी प्रथा 1792 ई. में मद्रास प्रेसीडेंसी के बाराहमहल जिले में लागू की गई थी। इस व्यवस्था के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी तथा रैयतों (किसानों) के मध्य प्रत्यक्ष समझौते किए जाने लगे तथा राजस्व के निर्धारण एवं लगान वसूली में बिचौलियों अथवा जमींदारों की भूमिका समाप्त कर दी गई थी। सरल शब्दों में कहे तो रैयतवाड़ी व्यवस्था व्यवस्था में प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार भूमि का स्वामी होता था, जो सरकार को लगान देने के लिए उत्तरदायी होता था। भूमिदार के पास भूमि को रहने, रखने व बेचने का अधिकार होता था। भूमि कर न देने की स्थिति में भूमिदार को, भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होना पड़ता था।
Useful for : UPSC, State PSC, IBPS, SSC, Railway, NDA, Police Exams
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Web Title : Raiyatvadi Kshetro Ki Sthiti Kaisi Thi