‘रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ किसका कथन है?

(A) आचार्य भोजराज
(B) आचार्य वामन
(C) पंडितराज जगन्नाथ
(D) आचार्य विश्वनाथ

Answer : पंडितराज जगन्नाथ
Explanation : 'रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्' पंडितराज जगन्नाथ का कथन है। उनहोंने अपने ‘रसगंगाधर' में लिखा है-'रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्' अर्थात् रमणीय अर्थ का प्रतिपादन करने वाला शब्द काव्य है। रसगंगाधर में पंडितराज ने तीन काव्य लक्षणों को प्रस्तुत किया है। ये हैं सामान्य, परिष्कृत और फलित। सामान्य लक्षण के अनुसार रमणीय (सुंदर, मनोहर) अर्थ का प्रतिपादक शब्द ही काव्य है। पंडितराज के शब्द की विशेषता थोड़ा अलग है। प्रायः भाषा के सभी शब्द अर्थ प्रतिपादक होते हैं, निरर्थक शब्दों का भाषा में कोई स्थान नहीं होता। सामान्य भाषा के शब्दों के प्रतिपाद्य अर्थ से काव्य का प्रतिपाद्य अर्थ भिन्न होता है। जिसे पंडितराज रमणीय कहते हैं।
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Web Title : Ramniyarth Pratipadak Shabd Kavyam Kiska Kathan Hai