शेरशाह के शासनकाल में चांदी के रुपये एवं तांबे के दाम में क्या संबंध था?

(A) 1:8
(B) 1:16
(C) 1:32
(D) 1:64

Question Asked : [UPPCS (Pre) GS Ist History 1995]
Answer : 1:64
शेरशाह सूरी ने प्रचलित मुद्रा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किया था उसने खोटी मुद्राओं को प्रचलन से हटा दिया तथा कम मूल्य के सिक्कों का प्रचलन किया। ऐसे सिक्कों में तांबे के 'दामों' की संख्या सबसे अधिक थी। उसने चांदी के 'रुपये' को ढलवाया जो 1835 ई. तक प्रचलन में रहा। चांदी के एक रुपये की कीमत तांबे के दामों 64 के बराबर थी। शेरशाह ने 167 ग्रेनल के सोने का सिक्का भी ढलवाया जिन्हें 'अशर्फी' कहा जाता था। आकार-प्रकार में उसके सिक्के गोलाकार अथवा चौकोर होते थे तथा उन पर अरबी, फारसी तथा देवनागरी लिपियों में शेरशाह के नाम खुदे रहते थे। कुछ सिक्कों पर उसके नाम के अतिरिक्त इस्लाम के प्रथम चार खलीफाओं का नाम भी खुदा रहता था।
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Answers by users

Saumya Singh, December 8, 2021

Sabhi question bahut hi deep me puche gye hai iise hume kafi help mili hai thanku

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