वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि का अर्थ

(A) देव भी निर्बल को दु:ख देता है।
(B) बन्धओं के मध्ये गरीब होकर रहना उचित नहीं है।
(C) मूर्खों के साथ स्वर्ग में रहना भी अच्छा नहीं है।
(D) सज्जन व्यक्ति वज्र से कठोर और फूलों से भी कोमल होते हैं।

Answer : सज्जन व्यक्ति वज्र से कठोर और फूलों से भी कोमल होते हैं।
Explanation : वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि का अर्थ सज्जन व्यक्ति वज्र से कठोर और फूलों से भी कोमल होते हैं। यह संस्कृत की प्रसिद्ध कहावत है। वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि श्लोक, वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि मीनिंग इन हिंदी शब्दार्थ है सज्जन व्यक्ति वज्र से कठोर और फूलों से भी कोमल होते हैं। संस्कृत के मुहावरे एवं संस्कृत लोकोक्तियाँ के अर्थ सामान्य हिंदी के पेपर में अक्सर पूछे जाते है। संस्कृत की एक प्रचलित कहावत यह भी है–
गुणेर्विहीना बहुजल्पयन्ति।
अर्थ – गुणहीन व्यक्ति बकवास अधिक करते हैं।
Tags : संस्कृत मुहावरे, संस्कृत लोकोक्तियाँ
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Web Title : Vajradapi Kathorani Mrduni Kusumadapi