वक्री ग्रहों का फल कैसे मिलता है?

Answer : फल में तीन गुना वृद्धि
वक्री ग्रहों का फल: हर ग्रह के वक्री होने का अलग-अलग प्रभाव होता है। वक्री ग्रह अपने फल में तीन गुना वृद्धि करता है, यानी अगर वह शुभ है, तो बहुत ही शुभ फल देता है और शुभ ग्रह नहीं है, तो जीवन में विपत्ति, परेशानी और संकट लाता है। अभी इस समय मुख्य ग्रह वृहस्पति और शनि वक्री होकर चल रहे हैं। शुभ वृहस्पति ग्रह वक्री होकर व्यक्ति की प्रतिभा को निखारते हैं। मान-सम्मान औरकार्यक्षेत्र में विधि योग बनाते हैं। अधूरे काम को पूरा करने का रास्ता तैयार करते हैं। शनि इस समय कुंभ राशि में वक्री स्थिति में हैं और 11 अक्तूबर तक रहेंगे। शुभ शनि शभ फल में वद्धि करेंगे। शनिके विपरीत प्रभाव में दिखावेकी प्रवृत्ति बढ़ जाएगी। वक्री शनि के समाधान के लिए शनिवार को छतरी या लोहे की कोई वस्तु दान करें। शनि मंत्र- 'ओम्प्रांप्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' का जाप करें, लाभ होगा। शनिवार के दिन पीपल के पेड़ को पानी, दूध, गंगाजल और काले तिल से सींचें। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। वक्री गुरु के लिए धार्मिक पुस्तक का दान करें। निर्धनों को एक महीने का राशन दें। गुरुवार को पीली वस्तुओं का सेवन करें।
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Web Title : Vakri Grahon Ka Phal Kaise Milta Hai