गोदान उपन्यास | Godan PDF Download

Godan PDF Hindi Free Download
लेखक
प्रेमचंद - Premchand
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज
26.89 MB
कुल पृष्ठ
370
श्रेणी

होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी देकर अपनी स्त्री धनिया में कहा-गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। में न जाने कब लौटूं। जरा मेरी लाठी दे दे।
घनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले पाथकर पायी थी। बोली- अरे, कुछ रस-पानी तो कर लो। ऐसी जल्दी क्या है।
होरी न अपने झुरियों से भरे हुए माथे को सिकोड़कर कहा-तुझे रस-पानी की पड़ी है, मुझे यह चिंता है कि अबेर हो गयी तो मालिक से भेट न होगी। असमान पूजा करने लगेंगे, तो घंटों बैठे बीत जायगा।
“इसी से तो कहती हैं, कुछ जलपान कर लो। और आज न जानोगे तो कौन हरज होगा। अभी तो परसों गये थे।’

अगर इस पुस्तक संबंधी जानकारी में कोई गलती है या फिर इस पुस्तक से जुड़ा आपका कोई भी सुझाव अथवा शिकायत हो तो उसे यहां दर्ज कर सकते हैं।
Top Questions