यूरोपीय संघ के गठन के कारण क्या थे?

यूरोपीय संघ के गठन के कारण : द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद यूरोप के देशों ने स्वीकार किया कि उनके मध्य आर्थिक सहयोग उनके राजनीतिक संघर्षों को कम कर सकता है। यूरोप में आर्थिक एकीकरण व सहयोग की प्रक्रिया का आरम्भ इस मान्यता पर आधारित है। इस दिशा में सबसे पहला प्रयास 1950 में किया गया। वर्ष 1950 में यूरोप के 6 देशों द्वारा यूरोपीय कोयला व स्टील समुदाय (European Coal and Steel Community) की स्थापना करके किया गया। यह 6 देश थे-बेल्जियम, इटली, फ्रांस, पश्चिमी जर्मनी, लक्जेमबर्ग तथा नीदरलैंड. यूरोपीय कोयला व स्टील समुदाय का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के राष्ट्रीय कोयला और स्टील उद्योगों पर केन्द्रीयकृत नियंत्रण व सहयोग की व्यवस्था करना था। बाद में अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया गया। वर्ष 1957 में रोम की संधि के द्वारा यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) की स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य इसके सदस्य देशों के मध्य व्यापार तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों में सहयोग को मजबूत करना था। इसी के साथ ही यूनियन तथा अणविक ऊर्जा के विकास में सहयोग हेतु यूरोपीय आणविक ऊर्जा समुदाय (European Atomic Energy Community) की स्थापना की गई। बाद में इस संगठन में सम्मिलित देशों की संख्या का विस्तार हुआ। इसके साथ ही परिस्थितियों के अनुसार ही संगठन के ढाँचे में बदलाव किया गया।

यूरोपीय संघ सदस्य संख्या में विस्तार
इसके लाभों से प्रेरित होकर अन्य यूरोपीय देशों ने भी इसकी सदस्यता ग्रहण की। 1973 में ब्रिटेन, डेनमार्क तथा आयरलैंड ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय की सदस्यता ग्रहण की। 1981 में यूनान ने तथा 1986 में पुर्तगाल व स्पेन ने इसकी सदस्यता ग्रहण कर ली। अतः शीतयुद्ध की समाप्ति तक यूरोपीय आर्थिक समुदाय की सदस्यता बढ़कर 12 हो गई थी। वास्तव में यूरोपीय आर्थिक समुदाय (वर्तमान में यूरोपीय संघ) की सदस्यता में व्यापक विस्तार शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद हुआ है। सोवियत साम्यवादी व्यवस्था की समाप्ति के बाद पूर्वी यूरोप के देशों तथा सोवियत संघ से टूट कर आए नए गणराज्यों तथा पूर्वी यूरोप के देशों ने यूरोपीय संघ की सदस्यता ग्रहण कर ली। उत्तर शीतयुद्ध काल में सबसे पहले 1995 में फिनलैंड, आस्ट्रिया तथा स्वीडन ने यूरोपीय संघ की सदस्यता प्राप्त की। वर्ष 2004 में एक साथ पूर्वी यूरोप के 10 राज्यों ने यूरोपीय संघ में प्रवेश किया ये 10 राज्य हैं-चेक गणराज्य, साइप्रस, स्टोनिया, लटाबिया, लिथुआनिया, हंगरी, माल्टा, पौलैंड, स्लोवानिया तथा स्लोवाकिया। बुल्गारिया तथा रोमानिया द्वारा 2007 में यूरोपीय संघ का सदस्य बनने के बाद इसकी कुल सदस्य संख्या 28 हो गई। तमाम प्रयासों के बावजूद तुर्की को उसकी इस्लामिक छवि के कारण सदस्यता प्राप्त नहीं हो सकी। जनवरी 2021 में ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो गया तथा अब इसकी सदस्य संख्या घटकर 27 रह गई है। इसे बेक्जिट (BREXIT) के नाम से जानते हैं।

यूरोपीय संघ के ढाँचे में बदलाव
शीत युद्ध की समाप्ति के बाद 1992 में मास्ट्रिच संधि के द्वारा इसका नाम बदलकर यूरोपीय समुदाय (European Community) कर दिया गया। अभी तक इसका नाम यूरोपीय आर्थिक समुदाय था। इसके ढांचे में बदलाव की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण संधि 2007 की लिस्बन संधि, जो 1 दिसंबर, 2009 को अस्तित्व में आ गई तथा इस संधि के अस्तित्व में आते ही पूर्व की सभी संधियां सदा के लिए समाप्त हो गईं इसके द्वारा युरोपीय समुदाय का नाम बदलकर यूरोपीय संघ (European Union) कर दिया गया तथा उसे एक स्वतंत्र कानूनी व्यक्तित्व प्रदान किया गया, जिसका तात्पर्य यह है कि यूरोपीय संघ अन्य देशों के साथ एक राष्ट्र की तरह संबंध स्थापित कर सकता है। लिस्बन संधि ने देशों के मध्य सहयोग से संबंधित विषयों को अधिकार क्षेत्र (Competaence) तीन भागों में विभाजित कर दिया।

(अ) पहले भाग में यूरोपीय संघ के एकमात्र अधिकार क्षेत्र (Exclusive Competaence) में आने वाले पांच विषयों को शामिल किया गया.
1. कस्टम यूनियन,
2. आंतरिक बाजार,
3. मौद्रिक नीति का निर्धारण,
4. सामान्य मछली उत्पादन तथा
5. सदस्य देशों के लिए सामान्य व्यावसायिक नीति
इन सभी मामलों में यूरोपीय संघ को अकेले ही कार्यवाही करने का अधिकार है।

(ब) दसरे भाग में उन मामलों को शामिल किया गया है जिन पर युरोपीय संघ तथा सदस्य राष्ट्रों को साझा अधिकार क्षेत्र (Shared Competaence) प्राप्त है। इस श्रेणी में सम्मिलित मामले हैं-अंतरिक्ष, तकनीकि तथा विकास संबंधी शोध, विकास सहयोग तथा मानवीय सहायता इसी श्रेणी में कुछ ऐसे भी मामले हैं जिसमें यूरोपीय संघ सदस्य राष्ट्रों के मध्य समन्वय का कार्य करेगा। ये मामले हैं-आर्थिक, रोजगार संबंधी तथा सामाजिक नीतियों का समन्वय एवं सामान्य विदेश सुरक्षा तथा प्रतिरक्षा नीतियां।

(स) तीसरे भाग में वे मामले सम्मिलित हैं जिसमें यूरोपीय यूनियन को समर्थक अधिकार क्षेत्र (Supporting Competaence) प्राप्त है, जिसमें संघ समर्थक व सहयोग करने की भूमिका निभाता है। इसके अंतर्गत निम्न मामले सम्मिलित हैं-मानवीय स्वास्थ्य का सुधार एवं संरक्षण, उद्योग, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा, युवा खेलकूद एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, नागरिक संरक्षण तथा प्रशासनिक सहयोग। वर्तमान में यही व्यवस्था लाग है।

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