रस्सी जल गई ऐंठन नहीं गई का अर्थ और वाक्य प्रयोग

(A) बर्बाद होने पर भी अकड़ना
(B) अधिक लालच से अच्छा जो मिले उसी में संतुष्ट होना
(C) आदमी का साथ रहने से और सोने को कसौटी पर कसने से ही असलियत का पता चलता है।
(D) इनमें से कोई नहीं

Answer : बर्बाद होने पर भी अकड़ना
Explanation रस्सी जल गई ऐंठन नहीं गई (Rassi Jal Gayi Aithan Nahi Gayi) मुहावरे का अर्थ–'बर्बाद होने पर भी अकड़ना' होता है। मुहावरे का अर्थ–'बहुत बुरी हालत या बर्बाद होने पर भी अकड़ न छोड़ना' होता है। रस्सी जल गई ऐंठन नहीं गई का वाक्य प्रयोग – सिकंदर ने कहा, 'पुरु, तुम हार स्वीकार कर लो, मैं तुम्हें आजाद कर दूंगा।' पुरु बोला, 'प्राण चले जाएं तब भी मैं तुम्हारी अधीनता स्वीकार नहीं करूंगा।' यह सुनकर एक यवन सेनापति बोला, 'रस्सी जल गई ऐंठन नहीं गई।' मुहावरा का अर्थ किसी भाषा समृद्धि और उसकी अभिव्यक्ति क्षमता का विकास होता है। मुहावरों एवं कहावतों के प्रयोग से भाषा में सजीवता और प्रवाहमयता आ जाती है। सरल शब्दों में मुहावरे लोक सानस की चिरसंचित अनुभूतियां हैं। मुहावरा शब्द अरबी भाषा का है जिसका अर्थ है 'अभ्यास होना' या ‘आदी होना' और यह भाषा के प्राण हैं।
Tags : मुहावरे, सामान्य हिन्दी प्रश्नोत्तरी
Useful for : UPSC, State PSC, SSC, Railway, NTSE, TET, BEd, Sub-inspector Exams
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Web Title : Rassi Jal Gayi Aithan Nahi Gayi