स्वारथु सुकृतु न, श्रमु वृथा में कौन सा अलंकार है?

(A) अन्योक्ति अलंकार
(B) उदाहरण अलंकार
(C) विरोधाभास अलंकार
(D) काव्य लिंग अलंकार

Answer : अन्योक्ति अलंकार
Explanation : स्वारथु सुकृतु न, श्रमु वृथा,देखि विहंग विचारि। बाज पराये पानि परि तू पछिनु न मारि।। पंक्ति में अन्योक्ति अलंकार होता है। उपर्युक्त अन्योक्ति में प्रत्यक्ष अर्थ तो यह है कि कवि बाज को समझाते हुए कहता है कि शिकारी के निर्देश पर तू अपनी ही जाति के अपने बंधु-बांधवों को क्यों मार रहा है? किन्तु वास्तव में वह राजा जयसिंह को हिन्दू राजाओं के साथ युद्ध करने से विरत करना चाहता है। यहां 'बाज' से आशय राजा जयसिंह से, 'पच्छीनु' से आशय हिन्दू राजाओं से और 'पराए पानि' से आशय औरंगजेब से है।
अन्योक्ति अलंकार की परिभाषा – जहां अप्रस्तुत के द्वारा प्रस्तुत का व्यंग्यात्मक कथन किया जाए, वहां 'अन्योक्ति' अलंकार होता है। सामान्य हिंदी प्रश्न पत्र में अन्योक्ति अलंकार संबंधी प्रश्न पूछे जाते है। इसलिए यह प्रश्न आपके लिए कर्मचारी चयन आयोग, बीएड, आईएएस, सब इंस्पेक्टर, पीसीएस, बैंक भर्ती परीक्षा, समूह 'ग' आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी साबित होगें।
Tags : अन्योक्ति अलंकार, अलंकार, अलंकारिक शब्द
Useful for : UPSC, State PSC, IBPS, SSC, Railway, NDA, Police Exams
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Web Title : Swarathu Sukrtu Na Shramu Vrtha Main Alankar