आकाशीय बिजली कैसे बनती है?

(A) 1896
(B) 1904
(C) 1906
(D) 1900

Answer : बादलों में विपरीत आवेशों से
Explanation : जब ठंडी हवा संघनित होकर बादल बनती है, तब बादलों के अंदर गर्म हवा की गति और नीचे ठंडी हवा के होने से बादलों में धनावेश (पॉजिटिव चार्ज) ऊपर की ओर एवं ऋणावेश (निगेटिव चार्ज) नीचे की ओर होता है। बादलों में इन विपरीत आवेशों की अपनी क्रिया से विद्युत आवेश उत्पन्न होता है। इस तरह आकाशीय बिजली पैदा होती है। धरती पर पहुंचने पर आकाशीय बिजली बेहतर कंडक्टर (संचालक) तलाशती है, जिससे वह गुजर सके। इसके लिए धातु और पेड़ उपयुक्त होते हैं। बिजली अक्सर इन्हीं माध्यमों से पृथ्वी में जाने का रास्ता चुनती है। आकाशीय बिजली की एक बार की चमक 30 करोड़ वोल्ट और लगभग 30 हजार एपीयर के बराबर होती है। आकाशीय बिजली की एक चमक 100 वाट के बल्ब को तीन महीने तक जला सकती है।
Useful for : IAS, UPSC, RRB, IBPS, SSC etc.
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Web Title : Akashi Bijli Kaise Banti Hai