भारत में दल-बदल विरोधी कानून कब पारित हुआ था?

(A) वर्ष 1988 में
(B) वर्ष 1987 में
(C) वर्ष 1985 में
(D) वर्ष 1989 में

Answer : वर्ष 1985 में

Explanation : भारत में दल-बदल विरोधी कानून वर्ष 1985 में पारित हुआ था। यह 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से पारित हुआ। इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारतीय राजनीति में ‘दल-बदल’ की कुप्रथा को समाप्त करना था, जो कि 1970 के दशक से पूर्व भारतीय राजनीति में काफी प्रचलित थी। साथ ही संविधान की दसवीं अनुसूची जिसमें दल-बदल विरोधी कानून शामिल है को संशोधन के माध्यम से भारतीय से संविधान जोड़ा गया दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत दल-बदल के आधार पर सदस्यों की अयोग्यता का निर्णय संबंधित सदन के अध्यक्ष/सभापति के द्वारा किया जाता है, किन्तु यह कानून कोई समयावधि नहीं देता जिसके अन्दर पीठासीन अधिकारी को दल-बदल मामला विनिश्चित करना होता है। 52वें संविधान संशोधन 1985 द्वारा संविधान में 10वीं अनुसूची को शामिल कर निर्वाचन के पश्चात् दल-बदल करने वाले सदस्यों को अयोग्य घोषित करने के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है। इसके अन्तर्गत किसी सदस्य को निम्नलिखित स्थितियों में अयोग्य घोषित किया जा सकता है–
• कोई मनोनीत सदस्य शपथ ग्रहण के 6 माह पश्चात् किसी (न की 6 माह के अंदर) राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है।
• जब कोई निदेलीय सदस्य निर्वाचन के पश्चात् किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है।
• यदि वह उस राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से त्याग देता है।
• यदि वह उस राजनीतिक दल द्वारा दिए गए निर्देशों के विरुद्ध सदन में मतदान करता है।
Useful for : IBPS, SSC CGL, SSC CHSL or SSC MTS
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Web Title : Bharat Mein Dal Badal Virodhi Kanoon Kab Parit Hua Tha